चमेली के तेल के फायदे और नुकसान

चमेली के तेल के फायदे और नुकसान

एंटीसेप्टिक
चमेली के तेल को एंटीसेप्टिक लोशन की तरह इस्तेमाल में लाया जा सकता है। कारण यह है कि इसमें एंटीबैक्टीरियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाले) गुण पाए जाते हैं। वहीं एंटीसेप्टिक प्रभाव भी एंटीबैक्टीरियल की तरह बैक्टीरिया की सक्रियता को खत्म करने में मदद करता है। इस कारण यह कहा जा सकता है कि चमेली के तेल को एंटीसेप्टिक लोशन के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

डिप्रेशन को दूर कर मन में खुशी का संचार करे
जैसा कि हम लेख में पहले ही बता चुके हैं कि मुख्य रूप से चमेली का फूल अपनी खास खुशबू के कारण ही पहचाना जाता है। यही कारण है कि चमेली के तेल में भी वह सुगंध मौजूद होती है, जिसके कारण इसे डिप्रेशन के मरीजों के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। इस संबंध में थाईलैंड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक शोध में भी जिक्र मिलता है कि चमेली के तेल से की गई एरोमाथेरेपी डिप्रेशन के रोगियों पर सकारात्मक प्रभाव डालने के साथ-साथ उनमें खुशी के भाव का संचार भी कर सकती है। इस कारण यह कहना गलत नहीं होगा कि चमेली तेल के फायदे डिप्रेशन की समस्या में भी लाभकारी परिणाम प्रदर्शित कर सकते हैं।

ब्लड प्रेशर को करे नियंत्रित
चमेली के तेल का उपयोग ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए भी किया जा सकता है। माना जाता है कि एरोमाथेरेपी में इसके इस्तेमाल से कई जरूरी हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जो स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं। इनमें ब्लड प्रेशर को भी शामिल किया जा सकता है। दरअसल, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में जिक्र मिलता है कि चमेली के पौधे के एरियल पार्ट (पौधे का वह हिस्सा जो हवा में हो, जैसे फूल और पत्तियां) में एंटी-हाइपरटेंसिव (उच्च रक्तचाप को कम करने वाला) गुण पाए जाते हैं। चमेली के फूलों से ही इसका तेल बनाया जाता है, तो ऐसे में यह गुण चमेली तेल में होना भी स्वाभाविक है। इस कारण यह माना जा सकता है कि मन को शांत करने के साथ ही चमेली का तेल बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है। फिलहाल इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

मेनोपॉज के लक्षणों को कम करे
चमेली तेल के फायदे मेनोपॉज के लक्षणों से राहत दिलाने में भी सहायक साबित हो सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर इससे जुड़ा एक शोध उपलब्ध है। शोध के मुताबिक मेनोपॉज यानी मासिक चक्र बंद होने की उम्र में महिलाओं में इस बदलाव के कारण दिखने वाले लक्षणों को एरोमाथेरेपी के द्वारा कुछ हद तक कम किया जा सकता है, जिनमें चमेली के तेल का नाम भी शामिल है। इस कारण यह माना जा सकता है कि मेनोपॉज की स्थिति में चिंता, तनाव, अनिद्रा और भावनाओं में बदलाव जैसे कुछ लक्षणों को दूर रखने में चमेली का तेल मददगार साबित हो सकता है।

एंटी इंफ्लेमेटरी
चमेली तेल में सीधे तौर पर एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन को कम करने वाला) गुण पाया जाता है। वहीं इसकी पत्तियों के अर्क में भी यह प्रभाव मौजूद होता है। इस कारण चमेली के तेल के साथ इसकी पत्तियों से बने अर्क को भी सूजन से राहत पाने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इस कारण यह कहा जा सकता है कि किसी भी तरह की शारीरिक सूजन को दूर करने में चमेली का तेल प्रभावी साबित हो सकता है।

मुंह के संक्रमण से बचाव
मुंह से संबंधित कई संक्रमण मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों के बचे अवशेष के कारण पनपने वाले बैक्टीरिया की वजह से होते हैं। चमेली के तेल में एंटी-बैक्टीरियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) गुण पाया जाता है। इस कारण यह माना जा सकता है कि चमेली तेल का मुंह की सफाई के लिए इस्तेमाल मुंह के संक्रमण से राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। फिलहाल इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

त्वचा के लिए लाभकारी
त्वचा संबंधित विकारों के लिए कुछ एसेंशियल ऑयल पर किए गए एक शोध में पाया गया कि चमेली के तेल का उपयोग त्वचा के सूखेपन, अत्यधिक तैलीय त्वचा और सोराइसिस जैसे त्वचा संबंधित विकारों को दूर करने में भी लाभदायक साबित हो सकता है। इस कारण यह कहा जा सकता है कि चमेली का तेल अन्य समस्याओं के साथ-साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।

बालों के लिए फायदेमंद
त्वचा के साथ-साथ चमेली तेल के फायदे बालों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। दरअसल, बालों के झड़ने के कई कारण होते हैं, जिनमें चिंता, तनाव और स्कैल्प पर बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी शामिल हैं। वहीं लेख में हम पहले भी बता चुके हैं कि चमेली के तेल में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा संबंधी कई समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही यह तेल अवसाद को ठीक करने और मूड को बदलने का काम भी कर सकता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव चिंता और तनाव की स्थिति को कम करने में मदद कर सकता है। इस कारण यह माना जा सकता है कि चमेली तेल से सिर की मसाज कर बाल झड़ने के इन जोखिमों को दूर रखा जा सकता है। वहीं एक अन्य शोध में इस बात का जिक्र मिलता है चमेली के पेड़ से अलग किए गए एथेनोलिक अर्क में बालों के विकास को बढ़ावा देने की क्षमता पाई जाती है । इन तथ्यों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि चमेली का तेल न केवल बालों से जुड़ी समस्याओं में राहत पहुंचा सकता है, बल्कि यह उनके विकास को भी बढ़ावा देने का काम कर सकता है।

चमेली के तेल के नुकसान –
चमेली के तेल को केवल बाहरी तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है, इसलिए इसके कोई भी ज्ञात दुष्परिणाम नहीं हैं। फिर भी इसके अधिक इस्तेमाल से बचना चाहिए, नहीं तो कुछ संभावित दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जो इस प्रकार हैं। आरामदायक और उत्तेजक प्रभाव के कारण इसके अधिक उपयोग से बचना चाहिए। आरामदायक और उत्तेजक प्रभाव के कारण ही प्रसव से पूर्व गर्भवती महिलाओं को इस तेल का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है। फिलहाल इस संबंध में कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। कुछ लोगों में चमेली का तेल त्वचा संबंधित एलर्जी का कारण बन सकता है।